Photo-sharing app Instagram ने एक नया फीचर Roll-Out किया है जो लोगों को आसानी के साथ अपकी प्रोफाइल को ढूंढने में मदद करेगी। Instagram के द्वारा जरी किए गए इस फीचर का नाम है “Nametag Feature” यह फीचर Instagram यूजर के लिए Android और iOS दोनों प्लेटफार्म के लिए दुनयाभर में लॉन्च की गयी है। Nametag एक Customizable Identification है जिसे आप स्कैन करके अपने किसी दोस्त या परिचित के इंस्टाग्राम प्रोफाइल को खोज सकते हैं। आइए जानते है के इसे कैसे इस्तेमाल करें

  • Instagram App को खोलें।
  • अपने प्रोफाइल पर जाएं फिर यहां से ऊपर दाईं तरफ ‘Menu’ बटन पर टैप करें।
  • इसके बाद पहले आप्शन ‘Nametag’ को सिलेक्ट करें।
  • इसके बाद एक नया Window खुल जायेगा जो आपके Nametag के साथ Profile Name भी दिखायेगा।
  • दुसरे Instagram यूजर आपके इस Nametag को Scan कर के आपको फॉलो कर सकते है।
  • स्क्रीन के टॉप पे आपको Nametag को Customize करने का आप्शन दिखेगा जहाँ से आप कलर्स, ईमोजी और तरह-तरह के स्टिकर्स के साथ अपने Nametag को Customize कर सकते हैं। इसके बाद ये आपके Nametag Screen पर Background बन जायेगा।
  • Nametag के निचे ‘Scan a Nametag’ का आप्शन आपको दिखेगा जो आपको दुसरे Instagram यूजर के Nametag को स्कैन करने के लिए Allow करेगा।
  • अपने Nametag को Share करने के लिए स्क्रीन के उपरी दाई तरफ Share बटन का यूज़ करें।
  • वैसे ही, आप कैमरे से Nametag को “Scan a Nametag” स्क्रीन पर जाकर स्कैन कर सकते हैं और फिर अपने कैमरा ऐप को एक्सेस करने के लिए ऊपरी दाएं कोने पर टैप कर सकते हैं
  • इसके अलावा आप ‘Nametag’ को स्कैन करने के लिए कैमरे में दाईं ओर स्वाइप कर सकते है

इसके अलावा Instagram ने ये Confirm किया है के वो Us में Instagram School Communities को टेस्ट कर रहा है ।  ‘School Communities’ से आप दूसरे छात्रों के अलावा हाल ही में पास आउट हुए छात्रों से इस प्लैटफॉर्म पर जुड़ सकते हैं। अगर आप जॉइन करना चाहते हैं तो आप उसपर अपनी क्लास, स्कूल और किसी ग्रुप जैसे: मेजर, स्पोर्ट टीम को एक लाइन में लिखकर ऐड हो सकते हैं। जिन दोस्तों से आप नहीं जुड़े हैं, उनके मैसेजेज आपके पेंडिंग इनबॉक्स में जाएंगे जिन्हें आप अक्सेप्ट या डिक्लाइन कर सकते हैं। ‘nametag’ ऐंड्रॉयड और आईओएस, दोनों पर ही दुनियाभर में उपलब्ध है। जबकि ‘School communities’ अभी केवल यूएस के कुछ विश्वविद्यालयों में ही टेस्ट किया जा रहा है।